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सुबह की नमाज़ की अहमियत dastan no 32

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  _ * कहानी नंबर _32 *  * * "सुबह की नमाज़ की अहमियत" *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * * "इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) से पूछा गया  कि आख़िरी दिनों के लोगों का रिज्क व रोज़ी सीमित क्यों होगी। उन्होंने कहा !! क्योंकि उनकी नमजें कजा होंगी !!!  हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) की खिदमत में आकर कहा कि मैंने एक गुनाह किया है। हज़रत (अ.स.) ने फ़रमाया: अल्लाह माफ़ करेगा !!!! उस व्यक्ति ने कहा !!  उसने जो पाप किया है, वह बहुत बड़ा है !! इमाम (अ,) ने कहा: भले ही वह पहाड़ के बराबर हो, अल्लाह उसे माफ कर देगा !! इस व्यक्ति ने कहा कि मेरा पाप बहुत बड़ा है !!  उसने पूछा: लेकिन आपने क्या पाप किया है? और फिर इस ने इमाम (अ,) के पास अपना पाप बयान किया  जब इस व्यक्ति की बात पूरी हुई, तो इमाम आली मक़ाम (अ,) ने इस व्यक्ति को मोखातब किया और कहा: !!  अल्लाह इसे माफ़ कर देगा, मुझे डर था कि आप सुबह की नमाज़ नहीं पढ़े।  हैं*  * * "इसी तरह, अयातुल्लाह हज शेख हसन अली इस्फ़हानी अपने बेटे के लिए वसीयत में कहते हैं !! अगर इंसान चालीस रोज़ इबा...