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* ((ना-महरमों के साथ मज़ाक मना है))dastan no 51

* 🌹✨✨✨بسمہ تعالی🌹✨✨✨ *  * ((ना-महरमों के साथ  मज़ाक मना है।*)) ((दास्तान नंबर,51))  अबू बसीर बताते हैं कि मैं कुफ़ा में एक महिला को कुरान पढ़ाता था (यानी मैं दर्से कुरान देता था)। एक दिन मैंने किसी चीज़ के लिए उसका मज़ाक उड़ाया।  जब मैं हज़रत इमाम मोहम्मद बाक़िर (अ स) ने मेरी मलामत की  और कहा: जो शख्स भी तन्हाई  में गुनाह करता है, तो खोदावंदे आलम अपना लुत्फ़ व करम उससे दुर कर लेता हैं।  * हे अबू बसीर, वो कौन सी बात थी जो तुमने इस औरत से कही?  अबू बसीर: मैंने शर्म से सिर झुका लिया और तौबा किया। फिर इमाम (अ.स.) ने कहा: फिर से ऐसा मत करना। *  * • ⊰⊰✿✿⊱⊱ • •• *  * 6 बिहार अल-अनवर जिल्द 46 पृष्ठ 246 *  * • ⊰⊰✿✿⊱⊱ • •• *  اللھم صل علي محمد و آل محمد وعجل فرجھم📿 *  * • ⊰⊰✿✿⊱⊱ • •• * share please contect us +989056936120 join group link https://chat.whatsapp.com/FIWUARZSWJ3CRi91NbEeZr *🌹✨✨✨بسمہ تعالی🌹✨✨✨* *🌹🌺نامحرم سے مزاق ممنوع🌹🌺* *ابو بصیر بیان کرتے ہیں کہ میں کوفہ میں ایک عورت کو درس قرآن دیتا تھا ( یعنی قر...