Skip to main content

Posts

"अंगूठी के पत्थर का टूट जाना" *dastan no46

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * कहानी नंबर_46*  * * "अंगूठी के पत्थर का टूट जाना" *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * * "यूनुस नक्का़श इमाम अली नक़ी (अ,) के  चाहनेवालों में से एक थे। एक दिन वह परेशानी की स्थिति में इमाम (अ.स.) की खिदमत में आए और कहा:  की खलीफा के एक बड़े ओहदेदार ने मुझे एक पत्थर लाकर दिया और कहा कि उसके लिए एक अंगूठी बनाऊं इसके लिए एक अंगूठी बनाऊं !! इसे बनाते समय, पत्थर दो भागों में टूट गया है, अब मैं  चाहता हूं कि भाग जाऊं, क्योंकि पत्थर बहुत की़मती था! इमाम (अ) ने कहा !! अपने घर में जाओ, अलविदा !!  आप  ख़ैर के अलावा कुछ नहीं देखेंगे । "*  * * "अगले दिन यूनुस को सरकार की तरफ से बुलावा आ गया  और इस कीमती पत्थर के मालिक ने कहा !! मेरे लिए एक समस्या पेश आगई  है, अगर आप इसे हल कर सकते हैं तो बहुत अच्छा होगा !! मेरी दो पत्नियाँ हैं और दोनों में लड़ाई हो रही है!! यदि आप पत्थर को दो भागों में विभाजित करते हैं, तो यह आपके लिए बेहतर होगा, और जो भी मजदूरी है, उसका भुगतान करूंगा। "  * * "जब इमाम (अस) ने इस घटना को सुना, तो ...

"जाफरी होने के बारे में ताने" *dastan no 45

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  _ * कहानी संख्या _45*  * * "जाफरी होने के बारे में ताने" *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * * "अबू सबाह कनानी" इमाम जाफ़र सादिक (अ.स.) के सबसे बड़े फकिह और शागिर्द इमाम (अस)थे। "एक दिन वह इमाम सादिक (अ.स.) की खिदमत में थे और उन्होंने अर्ज़ किया कि मौला हम जो आपसे वास्ता और ताल्लुक रखते हैं इस वजह से बहुत दर्दनाक ज़बान के ज़ख्म हम पर लोग लगाते हैं!! इमाम (अ.स.) ने कहा: तुम पर कौनसा जबानी ज़ख्म लगा?तो अबू सबाह ने कहा जब भी कभी लोगों से तू तू मैं मैं हो जाए तो फौरन,,जाफरी खबीस,, कह कर ताना देते हैं।  इमाम (अस) ने कहा: क्या लोग सच में तुम्हें मेरी खातिर सर जनिश करते  हैं? अबू सबाह ने कहा: हाँ !!  इमाम ने कहा: कितने पस्त हैं वो अफ़राद।((फिर इमाम ने फरमाया हमारे सहाबी वह हैं जिनके जेरह शदीद होती हैं और वे केवल अल्लाह की खातिर अमल करते हैं और वे केवल अल्लाह से इस अमल का फल पाने की उम्मीद करते हैं, ये मेरे साथी हैं)) !!  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * संदर्भ: "दस्तानाई उसूल काफ़ी, मोहम्मद मोहम्मदी इश्तारदी, पृष्ठ 442।"  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ ••...

नसीहत जनाबे लुकमान हकीम (a,s) *dastan no 44

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * कहानी संख्या __ *44  * नसीहत जनाबे लुकमान हकीम (a,s) *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *   * * हजरत लुकमान (؏) ने अपने बेटे से कहा हे मेरे बेटे दो चीज़ को हमेशा याद रखना। और दो बातें  जरूर भूल जाना।*  * 🔶🔹👈🏻दो बातें जिन्हें हमेशा याद रखना है। *  * 1 *अल्लाह *  * 2 * मौत *  * * दो बातें जिन्हें हमेशा भूल जाना है: *  * * वह एहसान जो किसी सके साथ किया है *  * 2 * वह बुराई जो किसी ने आपसे की हो *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  *  बर्ग ज़िन्दगी, हमिद अल्लामा, पृष्ठ 90 * share please contect us +989056936120 join link https://chat.whatsapp.com/FIWUARZSWJ3CRi91NbEeZr  **✨✨✨✨✨ ﷽✨✨✨✨* *•┈┈•┈┈•┈┈••⊰⊰✿✿⊱⊱••┈┈•┈┈•┈┈•• *📖✨نصیحت جناب لقمان(؏)* *•┈┈•┈┈•┈┈••⊰⊰✿✿⊱⊱••┈┈•┈┈•┈┈••*  *✍🏻✨حضرت لقمان (؏) نے اپنے بیٹے سے کہا*    *🔷🔸👈🏻اے میرے بیٹے دو چیز کو ہمیشہ یاد رکھنا اور دو چیز کو ضرور بھول جانا* *🔶🔹👈🏻دو چیزیں جنہیں ہمیشہ یاد رکھنا ہے*  *1⃣🔹👈 خدا* *2⃣🔸👈 موت* *⛔ دو چیزیں ...

"अल्लाह की रहेमत पहले है और हिदायत बाद में " dastan no 43

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  _ * कहानी नंबर _43 *  "अल्लाह की रहेमत पहले है और हिदायत बाद में " *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  "इमाम सादिक (अ.स.) की खि़दमत में कुछ लोग मौजूद थे, जिनमें एक ईसाई भी शामिल था। बातचीत और सवाल-जवाब के दौरान, ईसाई ने छींक दी और हाज़रीन ने कहा," हदाक अल्लाह, "यानी अल्लाह तुम्हें हिदायत दे। "इमाम सादिक़ (अ.स.) ने कहा:" कहो, " यरहमोक अल्लाह" यानी अल्लाह आप पर रहम करे।  लोगों ने कहा मौला वो तो काफिर है ,इमाम (अस,) ने जवाब दिया: अगर अल्लाह तआला उस पर रहेमत नाजिल  नहीं करेगा तो वह हिदायत भी हासिल नहीं कर सकता है। क्योंकि बिना खोदा की रहेमत के कुछ भी हासिल नहीं हो सकता है इस लिए हमें चाहिए कि उसकी रहेमत को हासिल करने की कोशिश करें और उसकी रहमते खास उसी केलिए है जो गरीबों की मदद करे आज ईद का दिन है कोशिश करें कोई भी गरीब मायूस ना हो ।(इलाही अमीन)  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * संदर्भ: "दस्तानाई उसूल काफ़ी, मोहम्मद मोहम्मदी इश्तारदी, पृष्ठ 437।"  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• * share please contect us +989056936120 join link https://chat.whatsapp.c...

बकरा ईद की नमाज़ का तरीक़ा।

 बकरा ईद की नमाज़* १. बकरा ईद की नमाज़ को जमाअत  के अलावा फुरादा नमाज़ करके भी अदा किया जा  सकता है । २.बकरा ईद की नमाज़ ज़ोहर से पहले कभी भी पढ़ी जा सकती है । ३. ये दो रकात की नमाज़ होगी  बस नियत करें की *नमाज़ ए बकरा ईद  पढ़ता हूं सुन्नत कुरबतन इल्लल्लाह* । पहली रकात में सुर ए अलहमद के बाद  सुरा ए अल-आला पढ़ें  *बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निररहिम* *सब्बे हिसमा रब्बिकल आ’ला अल्लज़ी ख़लक़ा फ़सव्वा वल्लज़ी क़द दरा फ़हादा वल्लज़ी अख़रजल मर’आ फजा'अलहु ग़ोसाअन अहवा सनुक़रेओका फला तनसा, इल्ला माँशा'अल्लाहो इन्ना हु यालामुल जहरा वमा यखफ़ा वनोयस्सीरुका लिल्युसरा फज़क्किर इन नफ़ा'अतिज़्ज़िकरा सयज़्ज़क्करो मयीं यख़शा व यतजन्नबोहल अशक़ा अल्लज़ी यस्लन नारल कुबरा सुम्मा ला यमूतो फीहा वला यहया क़द अफ़लहा मन तज़क्का वज़ाकरस मा रब्बेही फसल्ला बल तुअसेरूनल हयातद दुनिया वल आखीरतु खैरुन व अबक़ा इन्ना हाज़ा लफीस्सुहुफिल ऊला सुहुफ़े इब्राहीमा वा मूसा* । इसके बाद 5 बार तकबीर ‌*अल्लाह हो अकबर * कहे और हर तकबीर के बाद हाथ उठाकर नीचे दी हुई दूआ पढे़ याद रहे 5 बार पढ़नी है ये दुआ...

* "दूसरों के गुनाहों पर परदा पोशी करना। " dastan no 42

 ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * कहानी नंबर _42 "*  * "दूसरों के गुनाहों पर परदा पोशी करना। " *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * * एक दिन हज़रत मुहम्मद (SAW) ने हज़रत इमाम अली (अ.स.) से पूछा !!  अगर आप किसी आदमी को गुनाह करते हुए देखेंगे तो क्या करेंगे !! हज़रत मौला अमीर अल-मुमीन (अस,) ने जवाब दिया !!  मैं इसे छुपाऊंगा !!  नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फिर से पूछा !!  अगर आप उसे फिर से गुनाह करते हुए देखेंगे तो आप क्या करेंगे? !!  मौला (अस,) ने पिछला जवाब दोहराया !!  मैं इसे छुपाऊंगा !!  पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने तीसरी बार कहा !!  मौला अमीर अल-मुमीनिन ने तीसरी बार एक ही जवाब दिया, मैं इसे छिपाऊंगा !!  हज़रत मुहम्मद (SAW) ने कहा !!  अली (अस) के अलावा कोई जवान मर्द नहीं है !!  फिर हज़रत मुहम्मद (सल्ल।) ने अपने साथियों से मुखातिब होकर फरमाया  !!  अपने भाइयों के लिए परदा पोशि किया करो"*(लेकिन आज दुनिया में हम देखते हैं कि गुनाहों को छुपाना दूर की बात है अगर हमें कोई चीज मालूम हो जाती है किसी के बारे...

तवाजो़ह की क़ीमत खोदा के नज़दीक"dastan no 41

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  कहानी संख्या ,41*  * तवाजोह की क़ीमत खोदा के नज़दीक" *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * * * एक दिन अल्लाह ने मूसा (अ,) पर वही नाजिल की और पूछा: हे मूसा (अस), क्या आप जानते हैं कि मैंने आपको सब बन्दों के दरमियान तुमको कलीम यानी अपना हम कलाम क्यों बनाया है ?   उन्होंने कहा, "मुझे इसका रहस्य नहीं पता है।" तो अल्लाह ने उसे बताया और कहा, "मैंने तुम्हें अपने बन्दों में सबसे ज़्यादा  मोतावाज़ह पाया, इसलिए मैंने तुम्हें अपना हम कलाम बना लिया।"  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ *  संदर्भ , दास्तान हाय उसूल काफी मोहम्मद मोहम्मदी इश्तेहरदी पी। 451 *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• share please contect us +989056936120 join link https://chat.whatsapp.com/FIWUARZSWJ3CRi91NbEeZr *✨✨✨✨✨ ﷽✨✨✨✨* *•┈┈•┈┈•┈┈••⊰⊰✿✿⊱⊱••┈┈•┈┈•┈┈•• *📖"تواضع كى قيمت خدا كے نزديک"* *•┈┈•┈┈•┈┈••⊰⊰✿✿⊱⊱••┈┈•┈┈•┈┈••* *✍🏻"خداوند نے ايک دن حضرت موسى عليہ السلام پر وحى نازل كى اور پوچھا كہ اے موسى(؏) كيا توجانتا ہے كہ سب بندوں ميں سے ميں نے تم كو كليم يعنى اپنا ہمكلام كيوں بنايا ہے؟ حضرت م...