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**अहलेबैत (अस)का पैरोकार कौन?*

 ( 786)  **अहलेबैत (अस)का पैरोकार कौन?*  * एक व्यक्ति पैगंबर की खिदमत में आया , और कहा कि एक शख्स अपने पड़ोसी की नामूस पर बुरी नज़र डालना है। और अगर उसके लिए अपने पड़ोसी के घर में प्रवेश करना संभव होता, तो वह उसको भी करता ।और इज्जत की भी परवाह नहीं करता * यह सुनकर, रसूल (स,) बहुत गजबनाक  हो गए और कहा: उसे बताओ कि अल्लाह का रसूल (स)तुम्हें बुला रहा है। फिर एक दूसरे व्यक्ति ने कहा: हे अल्लाह के पैगंबर, वह आपका पैरोकार है और वह उन लोगों में से एक है जो आपकी विलायत और हजरत  अली की विलायत को कोबूल करते हैं, और आपके दुश्मनों से बेजार भी हैं। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा: उसे हमारा पैरोकार मत कहो, क्योंकि यह गलत है, क्योंकि हमारे पैरोकार वे हैं, जिनके कर्म हमारे कर्मों के समान हैं, लेकिन तुम्हारे अनुसार उनका किरदार हमारे जैसा नहीं है। * इसलिए अजीजो हमें चाहिए कि हम अपने किरदार को इमाम जैसा बनाए ना कि सिर्फ दिखावे के लिए हुसैनी बनने का दावा करें तो ऐसे हुसैनी को ना तो हुसैन अस,और ना दूसरे मासूम ना ही खोदा पसंद करता है। Please subscribe my YouTube channel deen e...

माहे मोहर्रम – माहे अज़ा

माहे मोहर्रम – माहे अज़ा पढ़ने का समय:   3   मिनट दीगर मज़ाहिब अपने साल का आगाज़ खुशी के साथ मनाते हैं। एक दुसरे को नए साल की मुबारकबाद देते हैं, नये कपड़े वगै़रा पहनते हैं, वगै़रा वगै़रा । मगर मुसलमानों में ये रिवाज नही है । इसकी क्या वजह है? इस बात से बहस नही के क्या इसलामी साल का पहला महीना मुहर्रमुल हराम है या ये कि साल का पहला महीना रबीउल अव्वल है। माहे मुहर्रम से साल का आगाज़ होता हो या न होता हो मगर ये तो तए है के ये महीना अहलेबैते पैग़म्बर के लिये ग़म का महीना है। इस महीने में वाक़ेऐ करबला रूनूमा हुआ जिस की याद अहलेबैते अतहार और उनके शियों के दिल को ग़म से भर देती है। एक मोतबर रिवायत जो शियों की कुतुबे अहादीस में नक़ल हुई है, में मिलता है, जिस में इमाम रज़ा (अ.स.) फ़रमाते हैं: ‘‘माहे मुहर्रम के शुरू होते ही कोई मेरे वालिद को मुसकुराता हुआ नही पा सकता था और आशूरा के दिल तक आपके चेहरे पर अन्दोह और परेशानी का ग़लबा होता था और आशूर का दिन आपके लिये मुसीबत और रोने का दिन होता था।’’ आप (अ.स.) फ़रमाते थे: ‘‘आज वो दिन है कि जिस दिन हुसैन (अ.स.) शहीद हुये हैं।’’ इस रिवायत में इमाम रज़ा ...

इमाम हुसैन अ. की इबादत

इमाम हुसैन अ. की इबादत इब्ने सब्बाग़ मालिकी बयान करते हैं कि "जब इमाम हुसैन अ. नमाज के लिए खड़े होते थे तो आपका रंग पीला पड़ जाता था। आपसे पूछा गया कि नमाज के समय ऐसा क्यों होता है? तो आपने कहा: तुम्हें नहीं पता कि मैं किस महान हस्ती के सामने खड़ा हो रहा हूँ!!!  इब्ने सब्बाग़ मालिकी बयान करते हैं कि "जब इमाम हुसैन अ. नमाज के लिए खड़े होते थे तो आपका रंग पीला पड़ जाता था। आपसे पूछा गया कि नमाज के समय ऐसा क्यों होता है? तो आपने कहा: तुम्हें नहीं पता कि मैं किस महान हस्ती के सामने खड़ा हो रहा हूँ!!! इमाम हुसैन अ. की इबादत 1.    इब्ने सब्बाग़ मालिकी बयान करते हैं कि "जब इमाम हुसैन अ. नमाज के लिए खड़े होते थे तो आपका रंग पीला पड़ जाता था। आपसे पूछा गया कि नमाज के समय ऐसा क्यों होता है? तो आपने कहा: तुम्हें नहीं पता कि मैं किस महान हस्ती के सामने खड़ा हो रहा हूँ!!! (अल-फ़ुसूलुल मुहिम्मा पेज 183) 2.    ज़मख़्शरी लिखते हैं कि "हुसैन इब्ने अली अ. को लोगों ने काबे का तवाफ़ करते देखा आप मक़ामे इस्माइल की तरफ़ गए, नमाज़ पढ़ने के बाद आपने मक़ामे इस्माइल...

अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली अ.ह

अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली अ.ह 13 रजब को अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म हुआ, आप पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम के चचाज़ाद भाई हैं और वह इसी नुबूव्वत की छाया में पले बढ़े और ख़ुद पैग़म्बर की देखरेख में आपका प्रशिक्षण हुआ। हज़रत अली अलैहिस्सलाम पहले आदमी थे जिन्होंने इस्लाम क़ुबूल किया बल्कि यूं कहा जाये कि अली अलैहिस्सलाम इस्लाम पर पैदा हुए, यह कहना बहुत बड़ा अत्याचार है कि अली अ.ह बच्चों में सबसे पहले इस्लाम लाये।  13 रजब को अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म हुआ, आप पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम के चचाज़ाद भाई हैं और वह इसी नुबूव्वत की छाया में पले बढ़े और ख़ुद पैग़म्बर की देखरेख में आपका प्रशिक्षण हुआ। हज़रत अली अलैहिस्सलाम पहले आदमी थे जिन्होंने इस्लाम क़ुबूल किया बल्कि यूं कहा जाये कि अली अलैहिस्सलाम इस्लाम पर पैदा हुए, यह कहना बहुत बड़ा अत्याचार है कि अली अ.ह बच्चों में सबसे पहले इस्लाम लाये। विलायत पोर्टलः 13 रजब को अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म हुआ, आप पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही...

आमाले दहवुल अर्ज़( यानी जिस दिन ज़मीन बिछाई गई)

आमाले दहवुल अर्ज़( यानी जिस दिन ज़मीन बिछाई गई) कल का दिन ज़मीन के निर्माण का दिन है,इस दिन के कुछ मखसूस आमल वारिद हुए है,जिनमें से अगर कोई इस दिन रोज़ा रखता है तो उसे 70 साल के रोज़ा रखने का सवाब मिलेगा। ➡️ आमाल। 1️⃣ रोज़ा 2️⃣ गुस्ल 3️⃣ दो रकत नमाज़ पढ़ना ज़ोहर के वक़्त जिसके पढ़ने का तरीका ये है कि हर रकात में सूरे हम्द के बाद पांच बार सुरे शम्श और नमाज़ के बाद पढ़े, ला हौला वला कूव्वता इल्ला बिल्ला हिल अलियुल अज़ीम,। 4️⃣जियारत इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम। और बहुत सी दुवाओं का ज़िक्र मोफातिह में हुआ है अगर कोई पढ़ना चाहे तो पढ़ सकता है। share please contact us +989056936120 https://chat.whatsapp.com/FIWUARZSWJ3CRi91NbEeZr ❤️25ذی القعده..... دحوالارض  اس دن روزہ رکھنا  ستر 70 سال کے گناہوں کا کفارہ ہے  سال کے چار اہم دنوں میں سے ایک اہم اور عظیم دن (روزِ دحو الارض) ہے. یہ دن حضرت ابراھیم اور حضرت عیسیؑ کی پیدائش کا دن بھی ہے. یعنی 25 ذیقعدہ کا دن مورخہ 17 جولائی 2020،  بروز جمعہ . دحو الارض کے معنی زمین کو پھیلانے کے ہیں. ابتدا میں زمین کی پوری سطح، پانی سے ڈھ...

* इमाम रज़ा(अ,स) का मुनाज़ेरा,dastan no,57

* 🌹✨✨✨ بسمہ تعالی🌹✨✨✨ *        * * इमाम रज़ा(अ,स) का मुनाज़ेरा ! *                       कहानी नम्बर,57  इमाम अली रज़ा (अ.स.) इब्ने रामिन (फ़क़ीह) से पूछते हैं: हे इब्ने रामिन! मुझे बताओ, जब  पैगम्बर (स,) ने मदीना छोड़ा , तो उन्होंने किसी को अपना जानशीन बनाया था या नहीं? *  * इब्न रामिन ने उत्तर दिया: उन्होंने हज़रत अली (अ.स.) को अपना जानशीन बनाया था।  इमाम रज़ा (अ.स.) ने पूछा: हे रामिन तो कियुं, नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मदीना के लोगों को जानशीन चुनने का आदेश नहीं दिया, जबकि आपकी राय में किसी भी सूरत में आप का इज्तेमा ग़लत नहीं हो सकता है। *  इब्ने रामिन ने उत्तर दिया:  पैगंबर (स,) को डर था कि मदीना के लोगों में कहीं इख्तेलफ़ और फितना हो सकता है। *  * इमाम: कोई बात नहीं, भले ही फितना और फसाद पैदा हो जाता , लेकिन जब अल्लाह के रसूल मदीना लौट आते, तो वो  इसे सही कर देते। *  * इब्ने रामीन: उन्होंने जो काम किया वह उचित और बेहतर था *  इमाम: तो इस आधार पर...

* बेहतर जीवन के लिए पांच उसूल_ *dastan no 56

* ﷽✨✨✨✨ *  * • ⊰⊰✿✿⊱⊱ • •• *  * कहानी नंबर  *56  * * बेहतर जीवन के लिए पांच उसूल_ *  * • ⊰⊰✿✿⊱⊱ • •• *  * * हज़रत अली इब्ने अबी तालिब (अस)ने इरशाद फरमाया, आए कुमैल,किसी भी हाल में हक बोलने से गुरेज ना करो ,परहेजगार लोगों से दोस्ती रखो ,फासिकों और गुनाह गारों से  डरे रहो और ख़यानत करने वाले से दोस्ती ना करो  *👉🏻🔷🔹 *  * • ⊰⊰✿✿⊱⊱ • •• *  * * पहला उसूल_ *  * अपने पूरे जीवन में हक का समर्थन करें, चाहे  कठिन परिस्थितियों में हो या राहत में, चाहे आप सिंहासन पर हों या गरीबी में, जीवन के सभी हाल में सच बोलें और सत्य सुनें *  * _ दूसरा सिद्धांत_ *  * परहेजगार से दोस्ती रखें क्योंकि  मूत्तकी और परहेजगार लोग आपसे अल्लाह के लिए मित्रता करेंगे और जीवन की कठिन परिस्थितियों में आपको कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे, उनकी मित्रता का लाभ यह है कि वे आपको गुनाह करने से रोकेंगे। *  * तीसरा सिद्धांत_ *  * गुनहगारों से दोस्ती न करें क्योंकि वे आपको और आपके परिवार को गुनाह से आलुदा करेंगे, इसलिए अपने और अपने परिवार की रक्षा के लिए...

वेलायत, हज़रत अली (अ.स.) * dastan no 55

* 🌹✨✨✨ بسمہ تعالی🌹✨✨✨ *          * 🌹वेलायत, हज़रत अली (अ.स.) *        55   ,दास्तान नंबर, ➡️  * मरहूम शेख अब्बास कुम्मी (अल्लाह उन पर रहमत नाजिल करे) अपनी किताब (तोहफतुर रज़विया) में लिखते हैं कि जब मुल्ला अहमद मुक़द्दस अर्दबिली (रज़,) जब उन्होंने इस दुनिया को छोड़ दिया, तो एक मुजाहिद ने उन्हें एक ख्वाब में देखा कि वह हज़रत अमीर अलैहिस्सलाम के रोज़े से सबसे अच्छी हालत में  बाहर तशरीफ ला रहे थे।   हरम के बाहर जाकर, मुजतहिद ने मरहूम मुक़द्दस अर्दबिली से पूछा कि आप इतने महान पद पर कैसे पहुंचे? *  * मुकद्दस अर्दबिली: मैंने अमाल के बाजार को हल्का  देखा, लेकिन , यानी अमल कुबुलियत का बाईस हो ऐसा बहुत कम होता है  लेकिन इस कब्र के मालिक (हजरत अली इब्न अबी तालिब (अ.स.) कि विलायत ने मुझे बहुत फायदा दिया है *और मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया है इस लिए हमें सिर्फ अमाल पर ही भरोसा नहीं करना चाहिए बल्कि विलायत का दामन साथ में रखना चाहिए । share please contect us +989056936120 https://chat.whatsapp.com/FIWUARZSWJ3CR...

* * बच्चों को अच्छा बनाने के कुछ आसान तरीके,dastan no 54

* ﷽✨✨✨✨ *  * • ⊰⊰✿✿⊱⊱ • •• *  * कहानी नंबर 54"*  * * बच्चों को अच्छा बनाने के कुछ आसान तरीके,  * • ⊰⊰✿✿⊱⊱ • •• *  * *एक पिता जो अज़ान कि आवाज़ सुनते ही तुरंत टेलीविजन बंद कर देता है और तुरंत नमाज़ के लिए चला जाता है, वह जल्द ही अपने बच्चों को इस तरीके से इबादत करने के लिए पाबंद बना लेगा। *  * 2 *पिता जो घर में घुसते ही सबसे पहले दरवाजा खटखटाता है और सलाम करने की पाबंदी करता है  जब वह अपनी पत्नी और बच्चों को देखता है मुस्कुराता है, तो इस तरह इसके बचाए भी घर में दाखिल होते वक़्त इजाज़त लेना, सलाम करना,और मुस्कुराना सीखेंगे।   * 3◼️👈🏻 पिता जो अपने माता-पिता का सम्मान करता है और उनके हाथों को चूमता है, जल्द ही उसके बच्चे भी उसके हाथों को चुनें गए और इताअत करेंगे ।   * 4 * पिता जो घर के कामों में अपनी पत्नी की मदद करता है, उसके बच्चे भी एक-दूसरे की मदद करना और सहयोग करना सीखेंगे। *  * 5 * अगर कोई माँ हिजाब, नमाज़ और कुरान की पाबंद है। , तो उसे देखकर उसकी बेटी भी हिजाब, नमाज़ और कुरान की पाबंदी करेगी। *  * 6 * माता-पिता जो एक-दूसरे...

असा का इमामत की गवाही देना।dastan no 53

* 🌹✨✨✨ بسمہ تعالی🌹✨✨✨ *      * 🌻इमामत की गवाही असा का देना🌻🌺 *          ((दास्तान नंबर 53))  *समार्रा के क़ाज़ी यहया बिन अक्सम का बयान है कि एक दिन मैं क़ब्रे रसूल का तवाफ कर रहा था तभी मैं ने देखा हजरत इमाम जवाब (अस)भी क़ब्र पैगम्बर का तवाफ कर रहे हैं, , जिसके बाद मैंने कुछ मसाइल में उनसे बहस की, जब उन्होंने  सबका जवाब दे दिया,तो मैंने कहा, "कसम खोदा की , मैं एक और सवाल पूछना चाहता हूं, लेकिन मुझे शर्म आती है।"  * इमाम (अ.स.) ने कहा: इससे पहले कि आप पूछें, मैं आपको बताऊंगा *  * आप बस यह जानना चाहते हैं कि इस समय लोगों का इमाम कौन है *  * याहया: हाँ,  वही है जो मैं जानना चाहता था *  * इमाम: मैं इस समय का इमाम हूँ *  * याहया: आपके इमामत की अलामत वा निशानी क्या है? *  * याहया बयान करता है कि उनके  हाथ में एक असा था। अचानक उन्होंने देखा कि इस असा से एक आवाज़ आई और उसने फसाहत के साथ कहा:  * यकीनन मेरे मौला इस वक़्त के इमाम और हुज्जत है *यानी इमामत की गवाही बे ज़ुबान लकड़ी भी देती है बस हम इंस...

((उसका बाप उसपर कुर्बान))अज़मत मसूमा क़ुम,(स,) dastan no 52

* 🌹✨✨✨ بسمہ تعالی🌹✨✨✨ *       ((उसका बाप उसपर कुर्बान))अजमत मसूमा कुम, दास्तान नंबर 52  * इमाम मूसा काज़िम (अ.स.) के समय में शियाओं का एक समूह इमाम से अपने सवालों के जवाब पाने के लिए मदीना पहुंचा, इत्तेफ़ाक़ से इमाम एक सफर पर थे लेकिन ये सोचते  हुए कि वह जल्द से जल्द अपने वतन लौट आएंगे।  उन्होंने अपने प्रश्न लिखे और उन्हें इमाम के रिश्तेदारों को सौंपने के लिए मजबूर हो गए। थोड़ी देर बाद, जब वे सभी अलविदा कहने आए, तो उन्होंने देखा कि फातिमा मासुमा (कुम) ने जवाब लिखे हैं और उन्हें तैयार किया है। इन लोगों को उन सवालों के जवाब दिए।  वह बहुत खुश हुए और अपने वतन के लिए रवाना हो गए। रास्ते में, वह हज़रत मूसा काज़िम (अ.स.) से मिले और  इमाम को अपनी कहानी सुनाई।  * इमाम ने उनसे नोट (उत्तर पुस्तिका) ले ली और उसे पढ़ना शुरू कर दिया और जवाबों को पढ़ने के बाद उन्होंने तीन बार कहा कि, उसका बाप उसपर कुर्बान (1) *यानी जवाबात बिल्कुल वहीं थे जो इमाम देते ।यानी बीबी इतना खोदा और उनके वलियों से करीब थीं की मेज़ाजे इमामत को समझने के लाइक हो गईं थीं। contect us +...

* ((ना-महरमों के साथ मज़ाक मना है))dastan no 51

* 🌹✨✨✨بسمہ تعالی🌹✨✨✨ *  * ((ना-महरमों के साथ  मज़ाक मना है।*)) ((दास्तान नंबर,51))  अबू बसीर बताते हैं कि मैं कुफ़ा में एक महिला को कुरान पढ़ाता था (यानी मैं दर्से कुरान देता था)। एक दिन मैंने किसी चीज़ के लिए उसका मज़ाक उड़ाया।  जब मैं हज़रत इमाम मोहम्मद बाक़िर (अ स) ने मेरी मलामत की  और कहा: जो शख्स भी तन्हाई  में गुनाह करता है, तो खोदावंदे आलम अपना लुत्फ़ व करम उससे दुर कर लेता हैं।  * हे अबू बसीर, वो कौन सी बात थी जो तुमने इस औरत से कही?  अबू बसीर: मैंने शर्म से सिर झुका लिया और तौबा किया। फिर इमाम (अ.स.) ने कहा: फिर से ऐसा मत करना। *  * • ⊰⊰✿✿⊱⊱ • •• *  * 6 बिहार अल-अनवर जिल्द 46 पृष्ठ 246 *  * • ⊰⊰✿✿⊱⊱ • •• *  اللھم صل علي محمد و آل محمد وعجل فرجھم📿 *  * • ⊰⊰✿✿⊱⊱ • •• * share please contect us +989056936120 join group link https://chat.whatsapp.com/FIWUARZSWJ3CRi91NbEeZr *🌹✨✨✨بسمہ تعالی🌹✨✨✨* *🌹🌺نامحرم سے مزاق ممنوع🌹🌺* *ابو بصیر بیان کرتے ہیں کہ میں کوفہ میں ایک عورت کو درس قرآن دیتا تھا ( یعنی قر...

शौहर की इताअत का इनाम,dastan no 50

* 🌹✨✨✨ بسمہ تعالی🌹✨✨✨ *          * * पति की इताअत का इनाम             (दास्तान नम्बर,50)  * पैगंबर(स,) के समय में, अंसार में से एक अपनी कुछ जरूरतों के कारण शहर से बाहर चला गया और उसने अपनी पत्नी से एक वादा लीया कि जब तक मैं वापस न आऊं तुम्हें घर नहीं छोड़ना है।  बाद में इस महिला को खबर मिली कि इसका बाप बीमार हो गया है, इसलिए उसने रसुल (स,)की खिदमत में एक संदेश भेजा कि मेरा पति दूसरे शहर में गया है और उसने मुझसे वचन लिया कि जब तक वह नहीं आए मैं घर से बाहर नहीं जाऊँ  मेरे पिता बीमार हैं, इसलिए उस स्थिति में, क्या आप मुझे उनसे मिलने का आदेश दे सकते हैं? *  नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा: अपने घर में बैठो और अपने पति का पालन करो। जब बीमारी बढ़ी तो इस महिला ने फिर कहा कि बीमारी बढ़ गई है।  आपने कहा: घर पर बैठो और अपने पति की बात मानो।  * वालिद का इन्तेक़ाल होगया  उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए संदेश भेजा? *  नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा: घर पर रहो और अपने पति की बात...

* हज़रत अली (अ.स.) ने कहा: गरीबी और कठिनाई सबसे बड़ी मौत है।dastan no 49

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * कहानी नंबर 49 "*  * अली (अ.स.) ने कहा:):  الفقر موت الاكبر۔   * हज़रत अली (अ.स.) ने कहा: गरीबी और कठिनाई सबसे बड़ी मौत है।  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *   * "मौत एक व्यक्ति को ज़िन्दगी  में केवल एक बार आती है और इसके साथ ही उसके सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं, लेकिन गरीबी और कठिनाई के कारण, एक इंसान बार-बार तकलीफ़ उठाता है। कभी-कभी शारीरिक दर्द।  कभी-कभी रूहानी पीड़ा - कभी-कभी भूख के कारण शरीर कांपने लगता है, कभी-कभी उसे अपनी  पत्नी, बच्चों और अन्य लोगों की परेशानियों को देखकर भी दिली कष्ट उठाना पड़ता है  उद्देश्य यह है कि गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति अपने ज़ाहेरी जीवन के बावजूद बार-बार मरता है और इस दुख के संकट को समाप्त करता है। इसलिए, मेरे वफादार भाइयों !! कभी भी किसी गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान न करें और अगर !!  यदि आप उसे कुछ नहीं दे सकते हैं, तो उसे उसके खुद्दारी और इज़्ज़त को मत छीन लेना , क्योंकि एक गरीब व्यक्ति की सांस आसमान से टकराती है और फिर उसका फैसला अल्लाह ही करता है ... *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• s...

📖☀️Success आज़माइश के बाद मिलती है *dastan no 48

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * कहानी नंबर 48*  * 📖☀️Success आज़माइश के बाद मिलती है *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * एक बार की बात है, एक राजा को उपहार के रूप में दो बाज़ मिले। उसने कभी इतने सुंदर पक्षी नहीं देखे थे। राजा ने दोनों पक्षियों को अपने सेवक को तरबियत करने के लिए दिया। "*  * "एक दिन नौकर ने राजा को बताया कि एक पक्षी ऊँचा उड़ रहा है और दूसरा अपनी शाखा से  जिस दिन  से आया है नहीं उड़ रहा है ..." *  * * "राजा ने सभी चिकित्सकों और राज्य के जादूगरों को बुलवाया लेकिन कोई भी इस ईगल को उड़ा नहीं सका ... राजा ने इस मुद्दे को अपने सलाहकारों के सामने रखा ... घंटे, दिन और दिन महीनों में बदल गए लेकिन  उड़ा नहीं सके ... "*  * *  "राजा ने किसी ऐसे व्यक्ति को बुलाने का फैसला किया जो कुदरत में गहरी दिलचस्पी रखता हो ... राजा ने अपने सलाहकारों को आदेश दिया कि वे किसी ऐसे व्यक्ति को खोजें, जिसने जंगल में वर्षों बिताए हों ..."  *  * * "अगले दिन राजा ने महल के बागों में उड़ते हुए बाज को देखा तो हैरान रह गया ... राजा ने उस आदमी को बुलाया ...

"खतरनाक खुश फहमी dastan 47

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  _ * कहानी संख्या _47 *  * "खतरनाक खुश फहमी"  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * * "इमाम सादिक (अ.स.) के सामने एक शख्स आया और कहा," मौला, मैं आपके कुछ ऐसे चाहने वालों को जानता हूँ जो खुद को आपका का शिया कहते हैं और पाप भी करते हैं, और फिर  वे कहते हैं, "अल्लाह सबसे बड़ा रहीम व करीम है वो हमें बख्श देगा,इमाम (अस) ने ये सब सुनकर कहा वो लोग झूठ बोलते हैं वो हमारे पैरोकार व दोस्त व शिया हरगिज़ नहीं है, "  और यह उनका भ्रम है जो उन्हें भटका रहा है। जब कोई व्यक्ति किसी चीज की उम्मीद करता है, तो वह उस तक पहुंचने की कोशिश भी करता है, और इसी तरह, अगर कोई व्यक्ति किसी चीज से डरता है, तो उसे उससे बचने की तदबीर  ढूंढ़ना चाहिए। तभी बच सकता है"*  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * संदर्भ: "दस्तानाई उसूल काफ़ी, मोहम्मद मोहम्मदी इश्तारदी, पृष्ठ ।"448  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈ share please contect us +989056936120 join link https://chat.whatsapp.com/FIWUARZSWJ3CRi91NbEeZr *✨✨✨✨✨ ﷽✨✨✨✨* *•┈┈•┈┈•┈┈••⊰⊰✿✿⊱⊱••┈┈•┈┈•┈┈••* *📖"خطرناک خوش فہمى"*  *•┈┈•┈┈•┈...

"अंगूठी के पत्थर का टूट जाना" *dastan no46

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * कहानी नंबर_46*  * * "अंगूठी के पत्थर का टूट जाना" *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * * "यूनुस नक्का़श इमाम अली नक़ी (अ,) के  चाहनेवालों में से एक थे। एक दिन वह परेशानी की स्थिति में इमाम (अ.स.) की खिदमत में आए और कहा:  की खलीफा के एक बड़े ओहदेदार ने मुझे एक पत्थर लाकर दिया और कहा कि उसके लिए एक अंगूठी बनाऊं इसके लिए एक अंगूठी बनाऊं !! इसे बनाते समय, पत्थर दो भागों में टूट गया है, अब मैं  चाहता हूं कि भाग जाऊं, क्योंकि पत्थर बहुत की़मती था! इमाम (अ) ने कहा !! अपने घर में जाओ, अलविदा !!  आप  ख़ैर के अलावा कुछ नहीं देखेंगे । "*  * * "अगले दिन यूनुस को सरकार की तरफ से बुलावा आ गया  और इस कीमती पत्थर के मालिक ने कहा !! मेरे लिए एक समस्या पेश आगई  है, अगर आप इसे हल कर सकते हैं तो बहुत अच्छा होगा !! मेरी दो पत्नियाँ हैं और दोनों में लड़ाई हो रही है!! यदि आप पत्थर को दो भागों में विभाजित करते हैं, तो यह आपके लिए बेहतर होगा, और जो भी मजदूरी है, उसका भुगतान करूंगा। "  * * "जब इमाम (अस) ने इस घटना को सुना, तो ...

"जाफरी होने के बारे में ताने" *dastan no 45

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  _ * कहानी संख्या _45*  * * "जाफरी होने के बारे में ताने" *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * * "अबू सबाह कनानी" इमाम जाफ़र सादिक (अ.स.) के सबसे बड़े फकिह और शागिर्द इमाम (अस)थे। "एक दिन वह इमाम सादिक (अ.स.) की खिदमत में थे और उन्होंने अर्ज़ किया कि मौला हम जो आपसे वास्ता और ताल्लुक रखते हैं इस वजह से बहुत दर्दनाक ज़बान के ज़ख्म हम पर लोग लगाते हैं!! इमाम (अ.स.) ने कहा: तुम पर कौनसा जबानी ज़ख्म लगा?तो अबू सबाह ने कहा जब भी कभी लोगों से तू तू मैं मैं हो जाए तो फौरन,,जाफरी खबीस,, कह कर ताना देते हैं।  इमाम (अस) ने कहा: क्या लोग सच में तुम्हें मेरी खातिर सर जनिश करते  हैं? अबू सबाह ने कहा: हाँ !!  इमाम ने कहा: कितने पस्त हैं वो अफ़राद।((फिर इमाम ने फरमाया हमारे सहाबी वह हैं जिनके जेरह शदीद होती हैं और वे केवल अल्लाह की खातिर अमल करते हैं और वे केवल अल्लाह से इस अमल का फल पाने की उम्मीद करते हैं, ये मेरे साथी हैं)) !!  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * संदर्भ: "दस्तानाई उसूल काफ़ी, मोहम्मद मोहम्मदी इश्तारदी, पृष्ठ 442।"  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ ••...

नसीहत जनाबे लुकमान हकीम (a,s) *dastan no 44

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * कहानी संख्या __ *44  * नसीहत जनाबे लुकमान हकीम (a,s) *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *   * * हजरत लुकमान (؏) ने अपने बेटे से कहा हे मेरे बेटे दो चीज़ को हमेशा याद रखना। और दो बातें  जरूर भूल जाना।*  * 🔶🔹👈🏻दो बातें जिन्हें हमेशा याद रखना है। *  * 1 *अल्लाह *  * 2 * मौत *  * * दो बातें जिन्हें हमेशा भूल जाना है: *  * * वह एहसान जो किसी सके साथ किया है *  * 2 * वह बुराई जो किसी ने आपसे की हो *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  *  बर्ग ज़िन्दगी, हमिद अल्लामा, पृष्ठ 90 * share please contect us +989056936120 join link https://chat.whatsapp.com/FIWUARZSWJ3CRi91NbEeZr  **✨✨✨✨✨ ﷽✨✨✨✨* *•┈┈•┈┈•┈┈••⊰⊰✿✿⊱⊱••┈┈•┈┈•┈┈•• *📖✨نصیحت جناب لقمان(؏)* *•┈┈•┈┈•┈┈••⊰⊰✿✿⊱⊱••┈┈•┈┈•┈┈••*  *✍🏻✨حضرت لقمان (؏) نے اپنے بیٹے سے کہا*    *🔷🔸👈🏻اے میرے بیٹے دو چیز کو ہمیشہ یاد رکھنا اور دو چیز کو ضرور بھول جانا* *🔶🔹👈🏻دو چیزیں جنہیں ہمیشہ یاد رکھنا ہے*  *1⃣🔹👈 خدا* *2⃣🔸👈 موت* *⛔ دو چیزیں ...

"अल्लाह की रहेमत पहले है और हिदायत बाद में " dastan no 43

* ﷽✨✨✨✨ *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  _ * कहानी नंबर _43 *  "अल्लाह की रहेमत पहले है और हिदायत बाद में " *  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  "इमाम सादिक (अ.स.) की खि़दमत में कुछ लोग मौजूद थे, जिनमें एक ईसाई भी शामिल था। बातचीत और सवाल-जवाब के दौरान, ईसाई ने छींक दी और हाज़रीन ने कहा," हदाक अल्लाह, "यानी अल्लाह तुम्हें हिदायत दे। "इमाम सादिक़ (अ.स.) ने कहा:" कहो, " यरहमोक अल्लाह" यानी अल्लाह आप पर रहम करे।  लोगों ने कहा मौला वो तो काफिर है ,इमाम (अस,) ने जवाब दिया: अगर अल्लाह तआला उस पर रहेमत नाजिल  नहीं करेगा तो वह हिदायत भी हासिल नहीं कर सकता है। क्योंकि बिना खोदा की रहेमत के कुछ भी हासिल नहीं हो सकता है इस लिए हमें चाहिए कि उसकी रहेमत को हासिल करने की कोशिश करें और उसकी रहमते खास उसी केलिए है जो गरीबों की मदद करे आज ईद का दिन है कोशिश करें कोई भी गरीब मायूस ना हो ।(इलाही अमीन)  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• *  * संदर्भ: "दस्तानाई उसूल काफ़ी, मोहम्मद मोहम्मदी इश्तारदी, पृष्ठ 437।"  * ⊰⊰✿✿⊱⊱ ┈┈ •• * share please contect us +989056936120 join link https://chat.whatsapp.c...